शिवसेना के पांच नगरसेवक उद्धव ठाकरे की मौजूदगी में वापस लौटे

अविनाश पाण्डेय, मुंबई
शिवसेना और एनसीपी के बीच में बीते कुछ दिनों से काफी मतभेद चल रहे थे। जिसकी सबसे बड़ी वजह हाल ही में शिवसेना के पांच नगरसेवकों को तोड़कर अजीत पवार द्वारा एनसीपी में शामिल करवाना था। इसके पहले भी डीसीपी स्तर के ट्रांसफर को लेकर एनसीपी और शिवसेना में ठनी हुई थी। विवाद को खत्म करने के लिए खुद एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने मातोश्री में जाकर सीएम उद्धव ठाकरे से मुलाकात भी की थी। उस मुलाकात में अजीत पवार को भी पहुंचना था लेकिन वह उस दिन नहीं पहुंच पाए थे।

मंगलवार की शाम अजित पवार और उद्धव ठाकरे के बीच में हुई मुलाकात
शिवसेना की नाराजगी को देखते हुए उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने सीएम उद्धव ठाकरे से मुलाकात की और विवाद सुलझाने का प्रयास किया। इस मुलाकात में यह फैसला लिया गया कि शिवसेना के पांच नगरसेवकों को एनसीपी वापस कर देगी। बुधवार को शिवसेना के पांच नगरसेवकों ने उधव ठाकरे से मुलाकात कर उनकी मौजूदगी में दोबारा पार्टी में प्रवेश किया।

मनसे ने भी शिवसेना कसा था तंज
मनसे के अस्तित्व की शुरुआत ही राज ठाकरे के शिवसेना से अलग होने हुई थी।इसलिए मनसे ने हर वो पैंतरा आजमाया जो कभी स्वर्गीय बालासाहेब ने आजमाकर सियासी बुलंदियों को हासिल किया था। शुरू से ही शिवसेना पर हमलावर रही है मनसे ने भी एमवीए यानि महाविकास आघाड़ी में जारी खींचतान और मतभेद पर तंज कसा था। एमएनएस नेता संदीप देशपांडे ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा था कि 'रात के अंधेरे में पार्षदों को चुराकर सर्जिकल स्ट्राईक करने का दावा करने वाले आज दिन के उजाले में एनसीपी से भीख मांग रहे हैं'।

बीएमसी की पुरानी रंजिश पर मनसे ने साधा निशाना
दरअसल साल 2017 के अक्टूबर महीने में बीएमसी में अपनी संख्या बढ़ाने के लिए शिवसेना ने मनसे के 7 में से 6 पार्षदों को तोड़कर अपनी पार्टी में शामिल करवा लिया था। तब से ही मनसे शिवसेना से खफा है। सरकार में शामिल होने के बावजूद एनसीपी ने शिवसेना के पांच पार्षदों को तोड़कर अपनी पार्टी में शामिल करवाया वो भी अजीत पवार की मौजूदगी में इस बात शिवसेना काफी नाराज थी । इसी बात को लेकर मनसे कहा था कि सब समय समय की बात है।

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