मध्य प्रदेश: नेताओं ने भारी मन से किया अटल को याद, प्रदेश भर में रहा अघोषित बंद

भोपालपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के अंतिम संस्कार के दिन उनके गृह राज्य मध्य प्रदेश में सन्नाटा पसरा रहा। राज्य सरकार द्वारा छुट्टी घोषित किए जाने के साथ ही शुक्रवार को ज्यादातर जिलों के व्यापारियों ने स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह सहित राज्य के सभी बड़े नेता अंतिम संस्कार में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंचे हुए थे, जिसकी वजह से प्रदेश बीजेपी कार्यालय में सन्नाटा पसरा रहा। सूत्रों के मुताबिक रविवार को अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान में उनके गृहनगर ग्वालियर में सभा का आयोजन किया जाएगा।

मध्य प्रदेश: सुल्तानगढ़ झरने में अचानक आई बाढ़ में 12 लोग बहे, 30 से ज्यादा के फंसे होने की आशंका

शिवपुरीमध्य प्रदेश के ग्वालियर और शिवपुरी की सीमा पर स्थित पिकनिक स्पॉट सुल्तानगढ़ झरने में अचानक आई बाढ़ से बुधवार को एक बड़ा हादसा हो गया। एक डैम से पानी छोड़े जाने के कारण झरने में पानी का बहाव अचानक बढ़ गया, जिससे वहां पिकनिक मनाने आए 12 लोग बह गए। यह हादसा बुधवार शाम 4 बजे हुआ है। पानी के तेज बहाव के बीच चट्टानों में फंसे आठ लोगों को हेलिकॉप्टर की सहायता से बाहर निकाल लिया गया है। झरने के बहाव में 30-40 सैलानियों के फंसे होने की आशंका थी।

बेटे को शौर्य चक्र मिलने पर भावुक हुईं राइफलमैन औरंगजेब की मां

इंदौर
देश के 72वें स्‍वतंत्रता दिवस पर केंद्र सरकार की ओर से जम्‍मू-कश्‍मीर में आतंकवादियों के खिलाफ अदम्‍य साहस का परिचय देने वाले राइफलमैन औरंगजेब को शौर्य चक्र देने के ऐलान से उनकी मां बेहद खुश हैं। हालांकि उन्‍हें इस बात का दुख है कि उनका बेटा अब उनके साथ नहीं है। बता दें कि औरंगजेब का जम्‍मू-कश्‍मीर के पुलवामा से अपहरण कर लिया गया था और बाद में गोलियों से छलनी उनका शव बरामद हुआ था।

1991 के बाद मध्य प्रदेश छोड़ने वाले अटल कभी वापस नहीं लौटे

भोपाल
संस्कारित राजनीति के प्रतीक बने अटल बिहारी बाजपेयी का यूं तो जन्म से ही मध्यप्रदेश से नाता था लेकिन 1991 के बाद उन्होंने प्रदेश की राजनीति से खुद को अलग कर लिया था। अटल जी ने 1991 का चुनाव लखनऊ के साथ विदिशा से भी लड़ा था लेकिन बाद में उन्होंने लखनऊ को चुना और विदिशा को छोड़ दिया था। इसी के चलते बीजेपी ने युवा नेता शिवराज सिंह को विदिशा से उपचुनाव लड़ाया और शिवराज 2005 तक विदिशा के सांसद रहे।

....जब अपने भाषणों से बोलती बंद करने वाले अटलजी खुद हो गए थे 'स्पीचलेस'

सलिल एम और ब्रजेश परमार, उज्जैन
दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपने प्रखर भाषणों के लिए जाने जाते थे। उनके भाषण ऐसे होते थे जो लाखों लोगों के अंदर जोश और उत्साह भर देते थे लेकिन बहुत ही कम लोग हैं जो यह जानते हैं कि एक बार वह निःशब्द हो गए थे। यह 1934 का वह दिन था जब वह मध्य प्रदेश के उज्जैन में बारनगर टाउन में हुई वाद-विवाद प्रतियोगिता में वह हिस्सा ले रहे थे। वाद-विवाद के दौरान वह अपने सहपाठियों के सामने मुंह बंद करके खड़े रहे।