महाभारत 2019: राज्यों में कांग्रेस को 30 बार 50% से ज्यादा वोट, भाजपा को कभी नहीं

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में 50% वोट हासिल करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि आज तक के इतिहास में भाजपा इस आंकड़े को कभी छू नहीं पाई है। विधानसभा चुनावों में भी नहीं। दिलचस्प बात यह है कि विधानसभा चुनावों में गुजरात की जनता ने चार बार किसी पार्टी को आधे से ज्यादा वोट दिए। मगर हर बार यह पार्टी कांग्रेस रही।
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तेल के साथ तेल की धार भी देख रही है केंद्र सरकार

हमारे केंद्रीय मंत्री ने दामों में हो रही बढ़ोतरी के जो कारण बताए हैं वे दुनियाभर में विदित हैं। ओपेक ने उत्पादन कम किए हैं तो वेनेजुएला में राजनीतिक अस्थिरता है और अमेरिका ने ईरान से नाभिकीय समझौते रद्‌द करने की धमकी देकर उसके तेल को बाजार से बाहर करने की ठानी है। दूसरी ओर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि की रफ्तार ठीक है। भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार भी दुनिया में प्रभावशाली है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था के साथ-साथ यूरोपीय संघ और चीन की स्थिति भी अच्छी है। ऐसे में तेल की मांग कम होने

सरकार बन गई है पर जारी जुगाड़ है- कुमार विश्वास की व्यंग्यात्मक श्रृंखला की पहली प्रस्तुति

राजनीति धूर्तों की प्रिय शरणस्थली है, ऐसा साहित्य के अंग्रेज़ ख़लीफ़ा शेक्सपीयर का कहना है। फिर मेरी क्या मान्यता है और दिन-प्रतिदिन की राजनीति पर क्या टिप्पणी है, ये आप सब से साझा हो, ऐसा देश के सबसे बड़े और मानक समाचार-पत्र ‘दैनिक भास्कर’ की इच्छा है। पर चाहे-अनचाहे मेरी टिप्पणी से भी पहले मुझे अपने जिस बालसखा की महाज्ञानी टीप सुननी ही पड़ती है, वे हैं ‘हाजी पंडित’!

महाभारत-2019 भास्कर दृष्टि: कर्नाटक में प्रचंड गति की महिमा, विजय के प्रकार व युद्ध का विस्तार

एक प्रश्न उठा कि कर्नाटक में विजयी कौन रहा? चूंकि सर्वाधिक बड़ी संख्या तो भाजपा के पास है। और सत्तारुढ़ होने जा रहे दोनों दलों में मतभेद ही नहीं, मनभेद हैं। तो क्या वे बने रहेंगे? जद-एस कांग्रेस और भाजपा दोनों की सरकारों को समर्थन देकर गिरा चुकी है। बिहार में महागठबंधन था। आज कहां है? स्वयं नरेन्द्र मोदी के समक्ष चुनौती नं. 1 बने नीतीश कुमार अब उन्हीं के समर्थन व मित्र दलों वाली 20 सरकारों में से एक है।

भास्कर संपादकीय: मोदी-पुतिन मुलाकात का बदलते हालात में महत्व

जब जून में शंघाई सहयोग संगठन के लिए चीन में, जुलाई में ब्रिक्स के लिए दक्षिण अफ्रीका में, अक्तूबर में दिल्ली में और नवंबर में जी-20 के लिए अर्जेंटीना में पुतिन और मोदी मिलने वाले हैं तो इस अनौपचारिक मुलाकात का विशेष अर्थ जरूर है। मोदी की यह यात्रा संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय स्थितियों के दौर में हो रही है और दुनिया के मंच पर नई ताकत के तौर पर उभरता भारत उन जटिलताओं को सुलझाने में कोई भूमिका निभाना चाहता है। संभवतः भारत अपने पुराने दोस्त को भरोसा भी देना चाहता है कि उसे अमेरिका और इजरायल तो चाहिए लेकिन,