जानें, कब से शुरू हो रहा है चातुर्मास, किन देवी-देवता की करें उपासना?

हिन्दू धर्म में चार विशेष महीने होते हैं जिनमे उपवास, व्रत और जप ताप का
विशेष महत्व होता है. वे महीने हैं - सावन, भाद्रपद,आश्विन और कार्तिक. देव
शयन एकादशी से ही चातुर्मास की शुरुआत होती है जो कार्तिक के देव
प्रबोधिनी एकादशी तक चलती है. इस समय में श्री हरि विष्णु योगनिद्रा में
लीन रहते हैं इसलिए किसी भी शुभ कार्य को करने की मनाही होती है.

जानें, कब है बटुक भैरव जयंती, क्या है पूजा विधि

22 जून शुक्रवार को बटुक भैरव जयंती का अद्भुत संयोग बना है. शुक्रवार को
उच्च के मंगल का का चित्रा नक्षत्र है. सम्पूर्ण दिन रात का रवियोग है.
उपाय से हर मनोकामना पूरी होगी. राहु कर्क  राशि में है, केतु मकर राशि में
है. शुक्रवार  को बटुक भैरव जी की जयंती की पूजा होगी. धोखा देने वाले
दुश्मनी करानेवाले राहु केतु होते हैं. बटुक भैरव पूजा करने से राहु केतु
शांत होंगे.

सोमप्रदोष पर बना है खास संयोग, मिलेंगे महालाभ

सोमप्रदोष पूजा से महालाभ मिलेगा. इस दिन का महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि
सोम प्रदोष पूजा के साथ चन्द्रमा मेष राशि में भी है. ज्येष्ठ अधिक मास का
सोमवार है. त्रयोदशी तिथि भी है, शुभ संयोग बना है. सोम प्रदोष दिवस पर
शिव पूजन से चार लाभ मिलता है-धन ऐश्वर्य का लाभ, पति का सौभाग्य जागेगा,
आपको भारी सफलता मिलेगी.

जानें, क्या है सीता नवमी का महत्व, कैसे करें पूजा?

हिंदू समाज में जिस प्रकार श्री राम नवमी का महत्व है, उसी प्रकार सीता
नवमी का भी है. जिस प्रकार अष्टमी तिथि भगवती राधा तथा भगवान श्रीकृष्ण का
आविर्भाव से संबंध है, उसी प्रकार नवमी तिथि भगवती सीता तथा भगवान श्री राम
के आविर्भाव की तिथि होने से परम आदरणीय है.

जानें, कब है मोहिनी एकादशी और क्या है इसका महत्व?

हिन्दू धर्मशास्त्रों में शरीर और मन को संतुलित करने के लिए व्रत और उपवास
के नियम बनाये गए हैं. तमाम व्रत और उपवासों में सर्वाधिक महत्व एकादशी का
है, जो माह में दो बार पड़ती है.