दयानंद सरस्वती की अधूरी चाहत जो कभी पूरी हो पाएगी?

आर्यसमाज के संस्थापक और आधुनिक पुनर्जागरण के प्रणेता कहे जाने वाले स्वामी दयानंद सरस्वती जी का जन्म 12 फरवरी 1824 ई. को गुजरात में फाल्गुन कृष्ण दशमी तिथि को हुआ था। हर साल इस तिथि को इनका जन्मदिन मनाया जाता है। इस साल यह तिथि 10 फरवरी को है।

साल के पहले सूर्य ग्रहण पर रखें इन बातों का खास ध्यान

इस साल का पहला सूर्य ग्रहण 16 फरवरी को पड़ने वाला है। अमावस्या में लगने वाला यह सूर्य ग्रहण आंशिक होगा, लेकिन भारत में नहीं दिखाई देगा। इसके साथ ही 11 अगस्त, 2018 को भी सूर्यग्रहण होगा, पर यह सूर्यग्रहण भी भारत में नजर नहीं आएगा। दरअसल सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी एक ही लाइन में आ जाते हैं। मगर आज आधी रात के बाद लगने वाला यह ग्रहण रात 12.25 मिनट से शुरू होगा और 16 फरवरी सुबह 4.18 बजे तक जारी रहेगा।

धार्मिक कार्यों में तांबे के पात्र का प्रयोग क्यों माना गया है शुभ

पूजा-पाठ या अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में जो जल इस्तेमाल किया जाता है वो तांबे के लोटे में ही रखा जाता है। इसके पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक कारण दोनों ही हैं। सूर्य नमन करते समय भी इस्तेमाल किया जाने वाला ग्लास तांबे का ही होता है। हिन्दू धर्म में सूर्य नमन या फिर सरल भाषा में कहें तो सूर्य को पानी देने का बहुत बड़ा महत्व है। हिन्दू धर्म में सुबह उठने के बाद साफ-सुथरे ढंग से नहाने के पश्चात सबसे पहले सूर्य भगवान को जल चढ़ाने की मान्यता है।

श्रवणबेलगोलाः भगवान का महामस्तकाभिषेक

ऐसे मौके बार-बार नहीं आते। 12 साल गुजरने के बाद आप महामस्तकाभिषेक के साक्षी बनते हैं। वर्ष 2018 का फरवरी महीना इसी का गवाह बना है। कर्नाटक राज्य का हासन जिला और उसका एक छोटा सा गांव श्रवणबेलगोला 17 फरवरी से लाखों जैन भक्तों की मेजबानी करेगा। वहीं महामस्तकाभिषेक के दौरान लोगों के रहने के लिए 12 नगरों और 17 महाभोजनालय का काम लगभग पूरा हो चुका है।