इतिहास का अटल दौर

पहले 13 दिन, फिर 13 महीने और फिर एक पूरा कार्यकाल – प्रधानमंत्री के रूप में यही इतिहास रहा अटल बिहारी वाजपेयी का। लेकिन यह तो सिर्फ अवधि की बात हुई, उस अवधि में जो काम उन्होंने किया, उसके मूल्यांकन के लिए वक्त को फुर्सत से बैठना पड़ेगा। यह ऐसा काम नहीं है कि चलते-चलते लगे हाथों निपटाया जा सके। अगर राजनीतिक कद, बतौर प्रधानमंत्री लिए गए ऐतिहासिक फैसले और सर्वस्वीकार्यता – इन तीन कसौटियों पर देखा जाए तो देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और अटलबिहारी वाजपेयी के बीच शायद ही कोई और प्रधानमंत्री आए। पंडित नेहरू ने अगर आधुनिक भारत की मजबूत नींव डाली तो वाजपेयी ने एक परम

खतरा टला नहीं

आतंकवाद की समस्या पर लगाम लगाने की तमाम कोशिशों के बाद भी दुनिया को इससे छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। एक तरफ आईएस जैसे संगठन की कमर टूट गई है तो दूसरी तरफ अल कायदा के फिर से मजबूत होने की खबरें आ रही हैं। हमारे लिए यह खास तौर से चिंता की बात है क्योंकि वह भारत को निशाना बनाना चाहता है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस आतंकी समूह का नया संस्करण ‘अल-कायदा इन इंडियन सबकांटिनेंट’ (एक्यूआईएस) यानी ‘भारतीय महाद्वीप में अल-कायदा’ नामक आतंकी गुट भारत में हमले करने की फिराक में है। यह अलग बात है कि भारत में सुरक्षा के बेहतर उपायों के कारण वह हमला नहीं कर पा रहा है। संयुक्त

पत्थर पर लकीर

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम अपने संबोधन में जो कुछ कहा, उससे न सिर्फ सरकार के भावी रुख का खुलासा हुआ बल्कि देशवासियों के मन में उठ रहे कई सवालों के जवाब भी मिले। प्रधानमंत्री ने जनता को आश्वस्त किया कि सरकार न सिर्फ जनहित से जुड़े ज्वलंत मुद्दों का समाधान ढूंढ रही है बल्कि देश को आगे ले जाने के लिए आत्मविश्वास के साथ नई योजनाएं भी शुरू कर रही है। जम्मू-कश्मीर को लेकर उन्होंने जो कहा उससे राज्य के लोगों को निश्चय ही राहत मिली होगी। इससे उन लोगों को एक जवाब भी मिला जो घाटी को लेकर सरकार की नीयत पर सवाल उठा रहे थे। पीएम ने कहा कि सरकार कश

सेना की बात

सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (आफ्स्पा) का मसला जितना विवादास्पद रहा है, उतना ही संवेदनशील भी माना जाता रहा है। इस पर जल्दी में कोई इकतरफा राय नहीं बनाई जानी चाहिए। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने भाषण में खुद प्रधानमंत्री ने ऐलान किया कि त्रिपुरा और मेघालय से पूरी तरह और अरुणाचल प्रदेश के कुछ जिलों से इसे हटा दिया गया है। ऐसी ही मांग जम्मू-कश्मीर और मणिपुर में भी लंबे समय से हो रही है, लेकिन उस पर कोई फैसला अभी नहीं हुआ है। इस बीच सेना के 356 ऑफिसर और जवान इस अपील के साथ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं कि आफ्स्पा की धाराओं को कमजोर न किया जाए। दरअसल मणिपुर में कथित मुठभेड़ों का

थोड़ी और उम्मीद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज लगातार पांचवीं बार लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करेंगे। 71 वर्षों की आजादी में ऐसा सौभाग्य उनसे पहले केवल छह लोगों जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, नरसिंह राव, अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह को ही प्राप्त हुआ है।