ठोस कार्रवाई की दरकार

पाकिस्तान सरकार ने आतंकवाद के मुद्दे पर पिछले हफ्ते कुछ कार्रवाइयों के जरिए विश्व जनमत का ध्यान खींचने की कोशिश की है। पिछले सोमवार को उसने आतंकवादियों के खिलाफ अभियान चलाने का ऐलान किया और गुरुवार तक प्रतिबंधित संगठनों द्वारा चलाए जा रहे 182 धार्मिक स्कूल सीज किए जा चुके थे। करीब 120 लोग हिरासत में लिए गए। जमात उद दावा के प्रमुख और मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को करीब डेढ़ दशकों में पहली बार जुमे की नमाज की अगुआई करने और नमाजियों को संबोधित करने से रोक दिया गया।

सबके लिए सुख

आईटी कंपनी विप्रो के चेयरमैन अजीम प्रेमजी ने दानशीलता और परोपकारिता का एक और बड़ा उदाहरण पेश करते हुए सबका दिल जीत लिया है। पिछले दिनों उन्होंने विप्रो के अपने लगभग 34 फीसदी शेयर यानी करीब 52,750 करोड़ रुपए अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को दान करने की घोषणा कर दी। इतना ही नहीं, प्रेमजी ने विप्रो के 67 फीसदी शेयर से होने वाली आमदनी भी चैरिटेबल फाउंडेशन को दान करने की प्रतिबद्धता जताई है। कंपनी में प्रेमजी के परिवार और कंपनियों की हिस्सेदारी 74.30 फीसदी है। अजीम प्रेमजी देश के उन चंद धनवानों में से हैं, जो अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा समाजसेवा के लिए देते रहे हैं।

समाधान का अवसर

अयोध्या मसले के समाधान का जो अवसर सुप्रीम कोर्ट ने दिया है, उसे सभी पक्षों को हाथोंहाथ लेना चाहिए। पूरा देश इस समस्या पर सकारात्मक रवैया अपनाए और इसका शांतिपूर्वक निपटारा किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई के दौरान सभी पक्षों से कहा कि अगर संभव हो सके तो मामले को मध्यस्थता से सुलझाया जाए। कोर्ट ने अपनी अहम टिप्पणी में कहा कि यह सिर्फ जमीन का मसला नहीं है बल्कि भावनाओं से जुड़ा हुआ मामला है, दिल और दिमाग में बनी खाई को पाटने का सवाल है। गौरतलब है कि वर्ष 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित भूमि को तीन हिस्सों में बांटने का आदेश दि

धनबल का बोलबाला

आम चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही देश में चुनाव सुधार के मुद्दे फिर से चर्चा में आ गए हैं। काले धन पर रोक लगाने और नकदी का लेन-देन घटाने के लिए ढाई साल पहले नोटबंदी जैसा ऐतिहासिक कदम उठाया गया था। इसके बावजूद कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार चुनावी खर्च के सारे रिकॉर्ड टूटने वाले हैं। सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज (सीएमसी) के अनुसार, इस चुनाव में 50 हजार करोड़ रुपए तक खर्च हो सकते हैं। कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनैशनल पीस के मुताबिक, साल 2019 का भारतीय आम चुनाव अमेरिकी चुनावी खर्च को भी पीछे छोड़ देगा। इसने ब्यौरा दिया है कि 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव और संसदीय चुनावों में 650 करोड़

जनतंत्र का उत्सव

आम चुनाव-2019 के लिए तारीखों का ऐलान हो गया है। देश में 11 अप्रैल से शुरू होने वाला चुनावी दंगल 7 चरणों में 19 मई तक चलेगा। मतगणना 23 मई को होगी। चुनाव आयोग ने अपनी जिन तैयारियों की चर्चा है, उससे साफ है कि इस चुनाव में तकनीक की और बड़ी भूमिका दिखने वाली है। चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए आयोग काफी सतर्क है। उसने तमाम संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए मुकम्मल व्यवस्था की है, खासकर सोशल मीडिया का दुरुपयोग रोकने के लिए। फेक न्यूज पर नजर रखने और अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर लगाम लगाने के लिए उसने कुछ खास लोगों को तैनात करने का निर्णय किया है।