बर्दाश्त से बाहर

तेलंगाना के हैदराबाद में एक पशु चिकित्सक युवती के साथ सामूहिक बलात्कार और उसकी हत्या के बाद उसे जिंदा जला दिए जाने की घटना ने देश को हिला कर रख दिया है। सड़क से लेकर संसद तक इस पर आक्रोश भड़क उठा है। इस हादसे ने एक बार फिर सात साल पुराने निर्भया कांड की याद दिला दी है। आज हर देशवासी के भीतर यह सवाल है कि आखिर हमारा सिस्टम ठीक उसी तरह के हादसे भी क्यों नहीं रोक पा रहा है?

झुलसा हुआ तंत्र

दिल्ली में रविवार को तड़के अनाज मंडी इलाके की एक फैक्ट्री में लगी आग में 43 लोगों की मौत ने एक बार फिर हमारे सिस्टम की पोल खोल दी है। आग लगने की कई घटनाएं राजधानी में पहले भी घट चुकी हैं। 17 लोगों की जान लेने वाली एक होटल में लगी आग इसी साल फरवरी की घटना है। उपहार सिनेमा जैसी त्रासदी आज भी पूरे देश को याद है लेकिन लगता नहीं कि राजधानी प्रशासन ऐसी घटनाओं से कोई सबक लेता है।

नए साथी, नई सरकार

महाराष्ट्र में लंबे राजनीतिक ड्रामे के बाद शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस की सरकार बन गई है। यह सिर्फ एक नई सरकार का बनना नहीं है बल्कि एक नए तरह के सियासी प्रयोग की शुरुआत भी है। तीनों दलों ने सरकार बनाने से पहले बाकायदा अपने गठबंधन के नाम का ऐलान किया और कॉमन मिनिमम प्रोग्राम भी जारी कर दिया। यह गठबंधन ‘महा विकास अघाड़ी’ कहलाएगा। कॉमन मिनिमम प्रोग्राम की शुरुआत में ही कहा गया है कि गठबंधन संविधान में वर्णित धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को लेकर प्रतिबद्ध है। इसमें किसानों, बेरोजगारों और महिलाओं के लिए कई तरह के ऐलान किए गए हैं। कह सकते हैं कि देश में गठबंधन राजनीति अपने एक नए दौर में प्रवेश कर रही है।

तकनीक की मार

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने एक अद‌्भुत प्रस्ताव रखा है। उन्होंने अपने देश की सरकारी एजेंसियों से कहा है कि वे अगले साल सिविल सेवा के अधिकारियों की दौ रैंक समाप्त कर दें और उनका काम आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए कराएं। इसके पीछे विडोडो का असली मकसद अधिकारियों का बोझ कम करना या सरकारी खर्चे घटाना नहीं है। उनका उद्देश्य है लाल फीताशाही में कमी लाना, जो उनके मुताबिक निवेश के रास्ते में बाधक है।

सुस्ती का सामना

देश के विकास की रफ्तार में लगातार आ रही कमी चिंता का विषय है। शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक जुलाई-सितंबर, 2019 की तिमाही के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि की दर 4.5 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह लगातार छठी तिमाही है, जब जीडीपी के बढ़ने की दर में गिरावट आई है। गौरतलब है कि जीडीपी किसी खास अवधि के दौरान वस्तु और सेवाओं के उत्पादन की कुल कीमत है। भारत में कृषि, उद्योग और सर्विसेज तीन प्रमुख घटक हैं जिनमें उत्पादन बढ़ने या घटने के औसत के आधार पर जीडीपी दर तय होती है। पिछले कुछ समय से इन तीनों ही क्षेत्रों में भारी सुस्ती दिख रही है। इंडस्ट्री की ग्रोथ रेट 6.7 फीसदी से गिरकर सिर्फ आधा