चुनौतियों के बीच

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर के रूप में पूर्व वित्त सचिव शक्तिकांत दास की नियुक्ति ने थोड़ा चौंकाया है। इससे एक हलके में यह संदेह पैदा हुआ है कि सरकार ने जानबूझकर अपने आदमी को इस पद पर बिठाया है ताकि अनुकूल फैसले कराए जा सकें। और शक्तिकांत दास की सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वह इस धारणा को गलत साबित कर दें। उन्होंने ऐसे समय कार्यभार संभाला है जब आरबीआई की साख और स्वायत्तता दांव पर लगी हुई है। पूरी दुनिया में यही संदेश गया है कि केंद्र सरकार इसकी स्वायत्तता को खत्म करने पर तुली हुई है। जिस तरह उर्जित पटेल और उससे पहले रघुराम राजन के साथ सरकार का विवाद हुआ, उसका काफी गलत मेसेज गया। द

राहत के संकेत

रिजर्व बैंक की यह सूचना सुकून देने वाली है कि हमारे बैंक अब फंसे हुए कर्ज (एनपीए) की समस्या से उबरने लगे हैं। ऐसा संकेत भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपने एक नोट में दिया है, जिसे कुछ अनुसूचित व्यवसायिक बैंकों के सितंबर तक के बिना ऑडिट हुए वित्तीय दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया गया है। रिजर्व बैंक ने कहा है कि पिछले वित्त वर्ष में चरम पर पहुंची सकल एनपीए राशि में चालू वित्त वर्ष की शुरुआती दो तिमाहियों में गिरावट आई है। खास बात यह है कि बैंकों ने जो कर्ज दे रखा है, उसमें से नए एनपीए बनने का अनुपात (स्लिपेज रेश्यो) भी तेजी से कम हो रहा है। बैंकों की ग्रॉस नॉन परफॉर्मिंग अ

सड़क पर मौत

यह वाकई दुखद है कि देश की सड़कों पर गड्ढों के चलते होने वाली दुर्घटनाओं में लोग बड़ी संख्या में मारे जाते हैं। यह हमारी विकास प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न है। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि देश की सरहद पर गोलीबारी में या आतंकवादी घटनाओं में जितने लोग मरते हैं, उससे कहीं ज्यादा लोग देश की सड़कों पर गड्ढों के चलते होने वाली दुर्घटनाओं में मौत का शिकार हो जाते हैं। सड़क सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज के एस राधाकृष्णन की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी की रिपोर्ट पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2013-2017 के दौरान गड्ढों के कारण

खत्म हो विवाद

राफेल सौदे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले में सरकार और विपक्ष दोनों के लिए एक जरूरी संदेश है। वह यह कि रक्षा जैसे संवेदनशील विषय को बिना किसी ठोस आधार के अदालत में खींचना और राजनीतिक मुद्दा बनाना ठीक नहीं है। कांग्रेस ने इस सौदे में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सरकार को घेरना शुरू कर दिया और इसे चुनावी मुद्दा बना डाला। सरकार अब इस पर कोर्ट के निर्णय को अपनी जीत बता रही है और विपक्ष पर पलटवार कर रही है। यह सब बंद होना चाहिए।

जरूरत में ढलें फौजें

नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने कहा है कि सेना के तीनों अंगों के बीच सहयोग और समन्वय काफी बढ़ा है, लेकिन वायुसेना एकीकृत थियेटर कमान के पक्ष में नहीं है। उन्होंने नौसेना सप्ताह के मौके पर आयोजित वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही। सेना के एक अंग की दूसरे अंग पर इस तरह की टिप्पणी आम तौर पर सुनने को नहीं मिलती, इसलिए यह बात थोड़ी चौंकाती जरूर है लेकिन इसे सेना के मनभेद की तरह नहीं, इसके विभिन्न अंगों के नजरिये में फर्क के रूप में देखना चाहिए। सच यह है कि रक्षा हलके में थियेटर कमान पर दो तरह की राय बन गई है। थियेटर एकीकृत कमान के तहत किसी क्षेत्र विशेष में थल, वायु और