चीन से टकराव: अपने हित बचाए जाएं

सरकार ने टिक टॉक समेत 59 चीनी मोबाइल ऐप्स को बैन करने का फैसला आधिकारिक तौर पर देश की संप्रभुता और सुरक्षा संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लिया है, फिर भी दुनिया जानती है कि यह चीन के खिलाफ की गई एक ठोस जवाबी कार्रवाई है। दो हफ्ते पहले सीमा पर हुई हिंसक झड़प में बीस जवानों की शहादत के बाद भारत सरकार चीन के खिलाफ कोई कड़ा कदम उठाने का दबाव महसूस कर रही थी।

संकट में प्रवासी भारतीय

कोविड 19 से उपजे हालात के साइड इफेक्ट के तौर पर एक और समस्या देश के सामने आ खड़ी हुई है। कई खाड़ी देशों से बेरोजगार होकर प्रवासी कामगारों की बड़ी तादाद भारत लौट चुकी है लेकिन अब उनकी वापसी की संभावना पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। कुवैत की नैशनल असेंबली में एक बिल लाया जा रहा है जिसका मकसद देश में प्रवासियों की संख्या में जबर्दस्त कमी लाना है।

टिड्डी: हवा में उड़ती आफत

दो दिन पहले टिड्डी दलों के गुड़गांव पहुंचने और दिल्ली के कुछ हिस्सों समेत एनसीआर के कई इलाकों में छा जाने से टिड्डियां अचानक खबरों में आ गईं, लेकिन हकीकत यही है कि देश के आठ-दस बड़े राज्यों में जारी उनका उत्पात अभी उस हद तक राष्ट्रीय अजेंडे पर नहीं आ पाया है, जितना इसे आना चाहिए था। पिछले डेढ़ महीने से पाकिस्तान की ओर से राजस्थान के रास्ते टिड्डी दल देश में घुसते चले आ रहे हैं।

लॉकडाउन जैसा अनलॉक

आज से देश लॉकडाउन के नए फेज में प्रवेश कर रहा है जिसे अनलॉक 2.0 कहा गया है। लॉकडाउन के चलते घरों में बंद लोगों को यह उम्मीद रही होगी कि अनलॉक 1.0 में जितनी छूटें उन्हें मिली थीं, उतनी ही और छूटें इस दूसरे अनलॉक में भी मिलेंगी और कुल मिलाकर बंदिशें इतनी कम हो जाएंगी कि कुछ सावधानियों के साथ वे सामान्य जीवन का आनंद ले पाएंगे। लेकिन ब्यौरे आए तो बात नाइट कर्फ्यू की अवधि में दो घंटे की कमी और दुकानों के अंदर पांच से ज्यादा लोगों के प्रवेश जैसी सांकेतिक छूटों तक ही सिमट कर रह गई।

हांगकांग की उलझी गुत्थी

हांगकांग में मानवाधिकार का मसला और उलझ गया है। चीन सरकार द्वारा वहां इसी सप्ताह सख्त सुरक्षा कानून लागू किए जाने के बाद अमेरिका ने चीन पर पाबंदियां लगाने वाला कानून लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है जबकि ब्रिटेन ने हांगकांग वासियों को निवास और नागरिकता उपलब्ध कराने का संकेत दिया है।