विषमता में जकड़ा देश

भारत में अमीर और गरीब के बीच की खाई बढ़ती ही जा रही है और सरकार इस असमानता को दूर करने की दिशा में कोई कदम भी नहीं उठा पा रही। गैर-सरकारी संगठन ऑक्सफैम और डिवेलपमेंट फाइनेंस इंटरनेशनल द्वारा इस संबंध में तैयार वैश्विक सूचकांक भारत सरकार की नीतियों और हाल की विकास प्रक्रिया को कठघरे में खड़ा करता है। इस सूचकांक में सामाजिक खर्च, कर ढांचा और श्रमिकों के अधिकार संबंधी नीतियों के आधार पर 157 देशों की रैंकिंग की गई है, जिसमें डेनमार्क सबसे कम विषमता के साथ शीर्ष पर है, जबकि भारत का मुकाम 147वां यानी लगभग तली में है। मंगलवार को जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण कोरिया, नाम

तेल का इंतजाम

ईरान से तेल आयात पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने की तारीख ज्यों-ज्यों नजदीक आ रही है, सरकार की चिंता बढ़ती जा रही है। देश में तेल की कीमत नियंत्रित करने और भविष्य में तेल आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखने के लिए वह लगातार हाथ-पैर मार रही है। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेल क्षेत्र के विभिन्न प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों के साथ बैठक की। इसमें सऊदी अरब के पेट्रोलियम मंत्री खालिद ए.

मौसम की अनदेखी

इंटर गवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) की ताजा रिपोर्ट ने जलवायु के मोर्चे से मानव जाति पर मंडरा रहे खतरे को बड़ी गंभीरता से रेखांकित किया है। लेकिन जब तक यह खतरा राजनीति के लिए मुद्दा नहीं बनेगा, तब तक इस मोर्चे पर ठोस फैसले होते नहीं दिखेंगे। पोलैंड में इसी दिसंबर महीने में होने वाली क्लाइमेट चेंज कॉन्फ्रेंस में इस रिपोर्ट के निहितार्थों पर विचार होना है। गौर करने की बात है कि इस सम्मेलन में सरकारें पेरिस समझौते की भी समीक्षा करेंगी, जिससे बाहर निकलने की घोषणा अमेरिका पहले ही कर चुका है।

आग पर पानी डालें

अभी गुजरात में जिस तरह उत्तर भारतीय कामगारों को निशाना बनाया जा रहा है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन उससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि पूरे मामले पर राजनीति हो रही है और मामले को संभालने के बजाय राजनीतिक दल एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने में जुटे हैं। यह मामला 28 सितंबर को साबरकांठा जिले में 14 महीने की एक बच्ची के साथ बलात्कार की घटना के बाद भड़का, जिसका आरोप बिहार के एक मजदूर पर है। उसके बाद गुजरात के पांच जिलों गांधीनगर, अहमदाबाद, पाटन, साबरकांठा और मेहसाणा में प्रदर्शन होने लगे और यूपी, बिहार और मध्य प्रदेश के लोगों को निशाना बनाया जाने लगा। कई जगह उन पर जानलेवा हमले क

सूरा सो पहचानिए

वह पुर्तगाल की सेना में एक छोटे से अफसर थे। उनकी जिंदगी सुख से बीत रही थी। धीरे-धीरे वह पुर्तगाल में सालाजार के बेहद भरोसेमंद जनरल बन गए। जाहिर है यह तरक्की उन्हें आसमान की ओर ले जाती क्योंकि जनरल बनने के बाद उनके पास असीम अधिकार आ गए थे। एक रोज उन्हें सालाजार की उन जेलों के बारे में पता चला जिनसे वह अब तक अनजान थे। उन्हें पता चला कि उनके देश में ऐसी जेलें हैं जिनमें उनके नागरिक वर्षों से कैद हैं और भयंकर यातनाएं पा रहे हैं।